ग्लोबल मार्केट में भी नहीं है कोरोना वैक्सीन? स्टॉक कम फिर कैसे निकलेगा समस्या का हल, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

 

ग्लोबल मार्केट में भी नहीं है कोरोना वैक्सीन, स्टॉक कम फिर कैसे निकलेगा समस्या का हल, पढ़ें पूरी रिपोर्ट
corona vaccine (सांकेतिक तस्वीर)

 

देश में कोरोना वैक्सीनेशन का तीसरा चरण चल रहा है, जिसमें 18 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों को वैक्सीन की डोज लगाई जा रही है. देश में भारत बायोटैक और सीरम इंस्टीट्यूट कोरोना की कोवैक्सीन और कोविशील्ड का प्रोडक्शन कर रहे हैं. वैक्सीन की सप्लाई में कमी के चलते अब करीब 10 राज्यों ने ग्लोबल मार्केट में कदम रखा है और टेंडर जारी किए हैं, इन राज्यों में दिल्ली, मुंबई और यूपी भी शामिल हैं.

 

हालांकि ग्लोबल मार्केट में भी वैक्सीन सही समय पर उपलब्ध हो पाए इसकी संभावना कम ही है. भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट के पास केंद्र सरकार की 16 करोड़ डोज़ का ऑर्डर है, करीब इतनी हो डोज वो राज्यों को सप्लाई कर सकते हैं. ऐसे में जरूरत की 10 से 15 फीसदी वैक्सीन डोज राज्यों को मिल पा रही हैं.

 

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हालात में बहुत अंतर नहीं

वैश्विक बाजार की बात करें तो वहां भी हालात में बहुत ज्यादा अंतर नहीं हैं. हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. केएस रेड्डी कहते हैं कि ग्लोबल मार्केट में भी वैक्सीन की डोज लिमिटिड हैं, ऐसे में सही समय पर वैक्सीन की सप्लाई मिलना वहां भी संभव नहीं है. स्पूतनिक वी को भारत सरकार की तरफ से मंजूरी मिल गई है और इसकी खरीद की जा रही है. ऐसे में उम्मीद है कि इसकी कुछ सप्लाई राज्यों को उपलब्ध हो जाए. चीन की कंपनियों की वैक्सीन का स्टॉक ग्लोबल मार्केट में हो सकता है, लेकिन उसे भारत में मंजूरी नहीं है. एस्ट्राजेनेका के पास स्टॉक हो सकता है, क्योंकि कई देशों ने इसका इस्तेमाल रोक दिया था. फाइजर और मॉडर्ना अन्य कई देशों को वैक्सीन की सप्लाई में लगे हैं, ऐसे में उनसे सप्लाई सही समय पर मिलना मुश्किल नजर आ रहा है.

 

कितनी वैक्सीन की देश को जरूरत

जहां राज्य वैक्सीन की उपलब्धता के लिए विदेशी कंपनियों के लिए ग्लोबल टेंडर डालने की प्रक्रिया में हैं, वहीं केंद्र सरकार भी विदेशी कंपनियों से बात कर रही है. इन कंपनियों को भारत में बुलाकर प्रोडक्शन के लिए भी कहा गया है. अप्रैल के डाटा के मुताबिक हर रोज करीब 20 लाख डोज लगाई गईं. अगर इस स्पीड को बरकरार रखना है तो हर महीने हमें करीब 6 करोड़ वैक्सीन डोज चाहिए होगी. 18 प्लस का वैक्सीनेशन जुड़ने के बाद करीब हर महीने 15 करोड़ वैक्सीन डोज की सप्लाई चाहिए होगी. इंटरनेशनल मार्केट में 20 अप्रैल तक 93 करोड़ डोज का प्रोडक्शन हुआ, इनमें से करीब 20 करोड़ वैक्सीन की डोज भारत में ही बनीं.

 

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