UP: CBI जांच में खुलासा, DGQA क्लर्क भर्ती में घोटाला, फेल को कर दिया पास

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रक्षा मंत्रालय के अधीन छह क्लर्कों की भर्ती में हुए घोटाले में सीबीआई (CBI) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। भर्ती की पूरी डील करीब एक करोड़ रुपये में हुई थी। इसके पुख्ता साक्ष्य सीबीआई को मिले हैं। सीबीआई ने एक कर्नल और परीक्षा बोर्ड में शामिल दो अधिकारियों को क्लीन चिट दी है।

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डीजीक्यूए (DGQA) में 2016 में क्लर्क के छह पदों पर भर्तियां निकली थीं। इसमें सामान्य श्रेणी के तीन, ओबीसी, एससीएसटी और दिव्यांग श्रेणी में एक-एक पद पर भर्ती होनी थी। इसमें चार हजार 181 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 952 का लिखित परीक्षा के लिए चयन हुआ था। भर्ती परीक्षा की कमेटी में पीठासीन अधिकारी व डिप्टी कंट्रोलर डॉ.  संतोष तिवारी, डीएमएसआरडीई की वैज्ञानिक नेहा अग्रवाल, मोहम्मद आलिम व सुनील कुमार थे। 

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जांच में पता चला कि परीक्षा के बाद बगैर सील के पीठासीन अधिकारी को कापियां सौंप दी गई थीं। पीठासीन अधिकारी ने खुद ही पूरी कापियां जाकर मूल्यांकन कर दिया। इसकी जानकारी वैज्ञानिक नेहा अग्रवाल को नहीं थी। 25 नवंबर 2016 को इसका परिणाम घोषित कर दिया गया। कुलमिलाकर ये पूरा काम अकेले पीठासीन अधिकारी ने कर दिया। 

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सीबीआई की जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया। डॉ. संतोष तिवारी ने कापी रिचेकिंग के  दौरान तीन नंबर से लेकर 11 नंबर तक बढ़ा दिए। पहली बार में कापी चेक कर जो नंबर दिए गए थे उनको काट दिया गया। उन्होंने सही उत्तर भी कई जगह पर खुद लिखे।

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दिव्यांग श्रेणी में भर्ती हुए अर्पित सिंह ने दिव्यांग प्रमाण पत्र ही नहीं दिया था। इसके बावजूद उनको कोेटे के तहत नौकरी दी। सीबीआई के पास ये पुख्ता साक्ष्य हैं। सीबीआई ने कर्नल के अलावा मोहम्मद आलिम व सुनील कुमार को क्लीन चिट दी है।

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