MP NEWS: महंगाई की आग से आम आदमी को अब ये टैक्स करेंगे जेब ढीली

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छिंदवाड़ा। पेट्रोल-डीजल के दामों में लगी महंगाई की आग से आम आदमी कराह रहा है। अब स्थानीय स्तर पर सम्पत्ति गाइड लाइन, प्रापर्टी टैक्स और उपभोक्ता प्रभार में वृद्धि का प्रस्ताव धडकऩें बढ़ाने वाला है। प्रदेश सरकार के संकेत मिले तो स्थानीय स्तर पर प्रशासन और नगर निगम इसे अप्रैल से लागू कर सकता है। इससे मकान मालिकों को पहले से ज्यादा टैक्स सरकारी खजाने में जमा करना पड़ेगा।

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सम्पत्ति गाइड लाइन

एक अप्रैल से लागू हो रहे वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिला स्तरीय सम्पत्ति गाइड मूल्य 20 प्रतिशत तक बढ़ाए जा सकते हैं। पंजीयन आइजी के निर्देश पर जिला पंजीयक द्वारा उपमूल्यांकन समितियों से अपने क्षेत्र की लोकेशन के 5, 10, 15 और 20 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव मांगे गए हैं। एक बार ये समितियां अपने प्रस्ताव दे चुकी थीं, लेकिन आइजी द्वारा दोबारा निर्देशित करने पर फिर से पत्र लिखा गया है। अब ये समितियां अपने क्षेत्र की लोकेशन में दर वृद्धि प्रस्ताव की तैयारी में हैं। फिर इसे जिला मूल्यांकन समिति के पास भेजेंगी, जहां से इसे केंद्रीय मूल्यांकन समिति भोपाल को भेजकर अंतिम स्वीकृति ले ली जाएगी।

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सम्पत्ति कर

नगर निगम के अधीन आवासीय और व्यावसायिक मकानों और भवनों पर लगने वाले प्रापर्टी टैक्स में भी दस प्रतिशत वृद्धि सम्भावित बताई जा रही है। इस टैक्स में वर्ष 2015 नगर निगम के गठन के बाद कोई वृद्धि नहीं हुई है। इस टैक्स को बढ़ाने के लिए राज्य शासन के नगरीय प्रशासन विभाग का दबाव है। हाल ही में नगर निगम की समय सीमा की बैठक में आयुक्त ने सम्पत्ति कर की दरों को संशोधित करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग के कर्मचारियों को सौंपी है। कर्मचारी इसका प्रस्ताव करने की तैयारी में है। अप्रैल में इसे लागू किया जा सकता है। शहर में इस समय 52 हजार मकान है, जिन पर अलग-अलग दरों के टैक्स है।

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उपभोक्ता प्रभार

नगर निगम के अधीन मकान मालिकों पर हर साल लगने वाले समेकित कर 180 रुपए के स्थान पर अब उपभोक्ता प्रभार प्रस्तावित किया गया है। नगरीय प्रशासन विभाग कभी भी इसके आदेश जारी कर सकता है। विभाग द्वारा मांगे गए प्रस्ताव पर नगर निगम द्वारा सेवाओं पर होने वाले खर्च, मकान संख्या और नल कनेक्शन धारियों की संख्या को भेज दिया गया है। सरकारी राय यह है कि स्वच्छता, अग्निशमन और प्रकाश व्यवस्था पर भारी भरकम खर्च की तुलना पर लिया जाने वाला टैक्स कम है और सरकार को सब्सिडी अधिक देनी पड़ती है। नगरीय प्रशासन विभाग सब्सिडी के बोझ को कम करना चाहता है।

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