राजस्व की भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा, गरीब को पीएम आवास बनाने के लिए कहीं जगह नहीं

राजस्व की भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा, गरीब को पीएम आवास बनाने के लिए कहीं जगह नहीं

राजस्व की भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा, गरीब को पीएम आवास बनाने के लिए कहीं जगह नहीं

रीवा। वर्ष 2021-22 के लिए 56 हजार प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास स्वीकृत हुए हैं। इनका रजिस्ट्रेशन भी हो चुका है। 15 से 20 फीसदी हितग्राहियों के खाते में राशि भी आ गई है लेकिन इनके पास घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। ये गरीब अपने पुरखों द्वारा बनाए गए दो कमरे के मकान में चार बच्चों के परिवार के साथ रहते हैं। इनका परिवार अलग होना चाहता है लेकिन जाए कहां?

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आपस में इसी घर को लेकर विवाद भी होते रहते हैं। इन्हीं गांवों में राजस्व विभाग की शासकीय भूमि भी है। जिसे भू-माफिया ने कब्जा कर लिया है। ऐसा कोई गांव नहीं है जहां राजस्व विभाग की सरकारी जमीन पर कब्जा न हो। राजस्व अमला विवाद से बचने के लिए शासन स्तर पर अतिक्रमण की जानकारी नहीं देता। जबकि शासन स्तर से आदेश है कि शासकीय जमीन के अतिक्रमण की जानकारी तत्काल हल्का पटवारी कलेक्टर को देंगे।

पटवारियों के द्वारा जानकारी न दिए जाने से राजस्व की भूमि पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। बताया गया है कि अगर हर गांवों की सरकारी जमीन का एक रिकार्ड पटवारियों के माध्यम से मंगाकर देखा जाए कि उक्त जमीन पर कौन काबिज है क्या इसे गरीबों को दिया जा सकता है। हो सकता है कि उन गरीबों के लिए यह फायदेमंद हो जाए जो जमीन के अभाव में प्रधानमंत्री आवास नहीं बना पा रहे।

पहाड़ से लगी जमीन पर सबसे ज्यादा अतिक्रमण

सबसे ज्यादा अतिक्रमण पहाड़ से लगी जमीन पर है। गुढ़ तहसील के बदवार से लेकर सीतापुर तक अतिक्रमण की बाढ़ आई हुई है। राजस्व विभाग पर सबसे राज्यदा अतिक्रमण है। कुछ लोगों ने वन विभाग की जमीन पर भी अतिक्रमण किया था जिससे उन्हें बेदखल कर दिया गया है। इसके अलावा डभौरा, अतरेला, सिरमौर, हनुमना, तहसील की जमीनों में अतिक्रमण है।

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56 हजार स्वीकृत आवास

रीवा जिले में 827 ग्राम पंचायत हैं। इन ग्राम पंचायतों के हितग्राहियों के लिए 56 हजार आवास स्वीकृत हुए हैं। ऐसी कोई ग्राम पंचायत नहीं है जहां के 10 से 20 हितग्राही के पास आवास बनाने के लिए जमीन न हो। जमीन न होने पर इनके खाते की राशि जमा रह जाती है। कुछ ऐसे भी हितग्राही होते हैं जो राशि निकाल लेते हैं और उसे अन्य मद में खर्च कर रहे हैं।

दो डिसमिल जमीन पर चार परिवार

जहां भी हरिजन, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग दलित बसे हुए हैं, उनके पास केवल दो डिसमिल का एक रकबा है। इसी में दो कमरे बनाकर इनका परिवार रहता है। अब परिवार बढ़ रहा है। अगर किसी के चार लड़के हैं और सभी को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ है तो वे आवास कहां बनाएं?

करोड़ों की भूमि मुक्त कराई जा चुकी

जिला प्रशासन ने जुलाई मास से लेकर अब तक में शहर एवं ग्रामीण क्षेत्राओं में भू-माफियाओं से करोड़ों रुपए की भूमि मुक्त कराया है। अभी भी यह अभियान चल रहा है। अगर विभिन्न तहसीलों के गांवों में अतिक्रमित जमीन की सूची पटवारिये से मंगवाकर पड़ा देने की पहल हो तो गरीब का भला हो जाएगा।

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