स्वास्थ्य मंत्रालय ने हेल्थ फैसिलिटी को लेकर अपनी राष्ट्रीय नीति में किया संशोधन, जानिये क्या है नया नियम

स्वास्थ्य मंत्रालय ने हेल्थ फैसिलिटी को लेकर अपनी राष्ट्रीय नीति में किया संशोधन, जानिये क्या है नया नियम

 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने हेल्थ फैसिलिटी को लेकर अपनी राष्ट्रीय नीति में किया संशोधन, जानिये क्या है नया नियम
सांकेतिक तस्वीर.

 

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देश में कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. बढ़ते मामलों के साथ ही सभी के अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है. ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कोविड-19 पॉजिटिव रोगियों के कोविड हेल्थ फैसिलिटी में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय नीति में संशोधन किया है, संशोधन के बाद निर्देश दिया गया कि किसी भी मरीज को अस्पताल से बगैर इलाज के जाने नहीं दिया जाएगा.

 

नए नियम के अनुसार अब कोविड स्वास्थ्य केंद्रों में प्रवेश के लिए कोविड-19 पॉजिटिव रिपोर्ट अनिवार्य नहीं है. कोविड -19 का एक संदिग्ध मामलों को कोविड केयर सेंटर (CCC), डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर (DCHC), डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल (DCH) के वार्ड में भर्ती किया जा सकता है.

 

नियम के अनुसार किसी भी मरीज का इलाज करने से मना नहीं किया जाएगा. उन्हें इलाज के दौरान पूरे सेवाएं दी जाएगी. इसमें ऑक्सीजन, जरूरी दवाइयां और मरीज़ की पूरी देखभाल जैसी सुविधाएं शामिल हैं. नियम में ये भी कहा गया है कि अगर मरीज किसी दूसरे शहर का है तो भी उसके इलाज से इनकार नहीं किया सकता.

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प्रमाणपत्र के आधार पर अस्पताल में एंट्री से नहीं रोका जा सकता

इसके अलावा मरीज को पेपर के आधार पर एंट्री से नहीं रोका जा सकता. अगर मरीज के पास कोई वैध प्रमाणपत्र नहीं है तो भी उसे अस्पताल में भर्ती मिल जाएगी. अस्पताल में एंट्री और बेड मरीज की स्थिति के अनुसार दी जाएगी. प्राथमिकता उन्हें दी जाएगी जिन्हें उस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत होगा. इसके अलाव मरीज को डिस्चार्ज करने के प्रोटोकॉल होंगे.

 

“जरूरत के आधार” पर होनी चाहिए भर्ती 

मंत्रालय ने यह भी कहा कि अस्पताल में भर्ती निश्चित रूप से “जरूरत के आधार” पर होना चाहिए. इसमें कहा गया, “यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बिस्तर उस व्यक्ति की वजह भरा न हो जिसे अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है. इसी के साथ, अस्पताल से छुट्टी भी संशोधित नीति के तहत होनी चाहिए.” मंत्रालय ने कहा कि उसने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को परामर्श दिया है कि वे तीन दिनों में इन निर्देशों का शामिल करते हुए आवश्यक आदेश और परिपत्र जारी करें, जो तब तक प्रभावी रहेंगे जब तक एक उचित एकरूप नीति इसकी जगह नहीं ले लेती.

 

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