बेटे की वज़ह से एक पिता को मिली नई जिंदगी, लीवर देकर बचाई जान, तो आइए जानते हैं पूरी कहानी…

बेटे की वज़ह से एक पिता को मिली नई जिंदगी, लीवर देकर बचाई जान, तो आइए जानते हैं पूरी कहानी…

मानव जीवन में परिवार से बढ़कर कुछ भी नहीं होता। यह हम सभी जानते और समझते हैं। जी हां और इसी बात को अब और मजबूती प्रदान की है एक बेटे ने। जिसने अपने बीमार पिता को एक नया जीवन देकर एक मिसाल कायम की है। जी हां बता दें कि इस युवक के पिता का लीवर खराब हो चुका था।

डॉक्टर ने कहा कि उनके पास अब ज्यादा समय नहीं है। ऐसे में लीवर ट्रांसप्लांट करना होगा। डोनर की बहुत जरूरत थी। फिर क्या… बेटे ने अपने लीवर का 65 फीसदी हिस्सा पापा को दान कर सबका दिल जीत लिया है और अब यह कहानी इंस्टाग्राम पर ‘ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे’ पेज ने शेयर की है जिसे पढ़कर बहुत से लोगों की आंखें नम हो गईं। तो आइए जानते हैं पूरी कहानी…

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बता दें कि लड़के का कहना है कि, “जब मुझे पता चला कि पापा का लीवर खराब है, तो मैं हैरान था! उन्होंने कभी सिगरेट और शराब को हाथ भी नहीं लगाया था। वहीं जब डॉक्टर ने कहा कि, ‘बिना डोनर (अंगदान करने वाला), उनके पास सिर्फ 6 महीने बचे हैं।’ तो मैं खुद को लाचार महसूस कर रहा था। पापा ने मुझसे कहा, ‘मैं मरना नहीं चाहता। मैं तुम्हे ग्रेजुएट (स्नातक) होते देखना चाहता हूं।’ आगे लड़के ने बताया कि, ‘घर का माहौल बदल गया था।

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खुशियां चली सी गईं और हमें उदासी ने घेर लिया। उसी दौरान कोविड की दूसरी लहर भी आई, जिसमें मैं संक्रमित हो गया! जब मैं आईसोलेशन में था तो बहुत रोया। क्योंकि मेरे पिता को मेरी जरूरत थी और मैं उनके पास नहीं था। हालांकि, मैं पापा को खुश (पॉजिटिव) रखने के लिए उन्हें वीडियो कॉल करता और लूडो में उनसे हार जाता। हम एक-दूसरे को उम्मीद दे रहे थे कि हम इससे उभर जाएंगे।

” इसी के साथ आगे लड़के ने बताया कि, “लेकिन मेरे ठीक होने के बाद, पापा वायरस की चपेट में आ गए! उन्हें नियमित रूप से हॉस्पिटल ले जाया जाता था इसलिए मैं उनके करीब बैठकर अपनी परीक्षा की तैयारी करता। मैं उन्हें ऐसे जूझते हुए और नहीं देख सकता था! इसलिए मैंने अपने परिवार से कहा कि मैं उन्हें बचाने जा रहा हूं और मैं उन्हें अपना लीवर डोनेट करूंगा!”

वहीं आगे उसने कहा कि, “किस्मत से, मेरा लीवर मैच हो गया, लेकिन वह फैटी था। मुझे अपने लीवर का 65 प्रतिशत उन्हें दान करना था। इसलिए मैंने एक्सरसाइज की और खाने पीने का खास ध्यान रखा। कुछ टेस्ट के बाद, मुझे कहा गया कि मैं सर्जरी के लिए स्वस्थ्य हूं! मैं राहत महसूस कर रहा था, लेकिन पापा रो पड़े! उन्होंने मुझसे कहा, अगर तुम्हें आगे चलकर कॉम्प्लिकेशन (परेशानी) हो गई तो क्या होगा? मैं खुद को माफ नहीं कर सकूंगा! लेकिन मैंने उनसे कहा, आपकी लड़ाई मेरी भी है। हम हारने वाले नहीं हैं! हमने सर्जरी पर अपनी बचत के 20 लाख रुपये लगा दिए।

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मां ने रोते हुए भारी मन से कहा- मेरी लाइफलाइन सर्जरी के लिए जा रही है। यह जानकर कि हम अपनी जान गंवा सकते हैं… पापा और मैं चिंतित थे। लेकिन पापा ने मजाक में कहा, ‘जब यह सब खत्म हो जाएगा तो मैं तुम्हें लूडो में हरा दूंगा!’ उनकी सोच ने मुझे ध्यान केंद्रित करने में मदद की और मैंने अपनी परीक्षा पास कर ली!”

वहीं लड़के ने आगे बताया कि, “और हमारी सर्जरी से दो दिन पहले मैं ग्रेजुएट हो गया! पापा ने कहा, मुझे डरा था कि मैं यह दिन नहीं देख सकूंगा। तुमने मुझे दुनिया का सबसे खुश पिता बना दिया! अब हमें बस एक और टेस्ट पास करना था और मैं दुआ कर रहा था कि सर्जरी आराम से हो जाए। जब मैं सर्जरी के बाद उठा तो डॉक्टर मुझे देखकर मुस्कुराया और कहा, तुमने अपने पापा को बचा लिया! मेरी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। जब पापा और मैंने एक-दूसरे के जख्मों को देखा तो उन्होंने कहा, ‘हमने इस लड़ाई को साथ लड़ा और जीत गए! महीनों से जो तनाव हमने महसूस किया था वह उड़ चुका था!

और हां, ठीक होने का सफर मजेदार था। हमने एक साथ व्हीलचेयर को चलाना सीखा और खूब समय लूडो खेलने में बिताया। आज, हम दोनों फीट हैं। अगर इस अनुभव ने हमें कुछ सिखाया है तो यह कि जीवन अनिश्चित है, और परिवार ही सब कुछ है।” इसके अलावा आख़िर में आप सभी को बता दें कि यह कहानी इस समय ना जाने कितने ही लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।

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