इमरान के सऊदी अरब के दौरे से पहले बाजवा पहुंचे रियाद, क्या कर्जमाफी को लेकर ‘मिन्नतें’ करने की हो रही है तैयारी?

 

इमरान के सऊदी अरब के दौरे से पहले बाजवा पहुंचे रियाद, क्या कर्जमाफी को लेकर 'मिन्नतें' करने की हो रही है तैयारी?

 

पाकिस्तान (Pakistan) के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा (Qamar Javed Bajwa) सऊदी अरब (Saudi Arabia) पहुंचे हैं. बाजवा ऐसे समय में रियाद (Riyadh) पहुंचे हैं, जब प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) का कुछ ही दिनों में महत्वपूर्ण सऊदी अरब का दौरा होने वाला है. माना जा रहा है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Mohammad bin Salman) के बुलाने पर इमरान सात मई को रियाद पहुंचने वाले हैं. इमरान इस दौरे पर सऊदी अरब द्वारा दी गई 3 अरब डॉलर के कर्ज को चुकाने के लिए और मोहलत मांग सकते हैं.

 

 

पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि बाजवा को हाल ही में सऊदी अरब में नियुक्त किए गए पाकिस्तानी राजदूत लेफ्टिनेंट-जनरल (रिटायर्ड) बिलाल अकबर और सऊदी के सैन्य अधिकारियों ने अगुवाई की. बाजवा इस दौरे पर सऊदी अरब के शीर्ष नागरिक और सैन्य नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं. माना जा रहा है कि ये मुलाकात इमरान की रियाद की निर्धारित यात्रा की तैयारी के हिस्से के तौर पर हो रही है. बाजवा का दौरा और इमरान की रियाद यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्तों पर जमी बर्फ को हटाने का प्रयास किया जा सकता है.

 

 

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दोनों मुल्कों के बीच रिश्तों में देखी गई गिरावट

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है. लेकिन हाल के सालों में दोनों मुल्कों के बीच रिश्तों में गिरावट देखने को मिली है. इस रिश्ते में पहली दरार तब देखने को मिली, जब पाकिस्तान ने सऊदी के नेतृत्व में यमन में हो रही जंग (War in Yemen) में पाकिस्तानी सैनिकों को शामिल करने से इनकार कर दिया. हालांकि, इस्लामाबाद द्वारा आतंकवाद के खिलाफ सऊदी नेतृत्व वाले इस्लामी सैन्य गठबंधन में शामिल होने के बाद संबंध कुछ सामान्य हो गए. हालांकि, दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को 2019 में एक गंभीर झटका लगा, दरअसल, पाकिस्तान ने मुस्लिम राष्ट्रों के प्रतिद्वंद्वी ब्लॉक बनाने की मलेशिया की पहल को समर्थन दिया.

 

 

जब सऊदी ने पाकिस्तान को कर्ज चुकाने को कहा

हालांकि, इससे पहले की पाकिस्तान इस ब्लॉक के शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले पाता, उससे पहले ही सऊदी अरब ने उसे परिणाम भुगतने की चेतावनी दे डाली. दोनों देशों के बीच रिश्ते उस समय भी तनावपूर्ण हो गए,जब रियाद ने कहा कि इस्लामाबाद उसके तीन अरब डॉलर कर्ज का जल्द से जल्द भुगतान करे. सऊदी अरब द्वारा कर्ज का भुगतान करने की बात कहना बेहद ही दुर्लभ था, क्योंकि आमतौर पर या तो किंगडम इसे माफ कर देता है या फिर इसे दान में तब्दील कर देता है. हालांकि, सऊदी अरब के इस फैसले ने इमरान खान के हाथ-पांव फुला दिए थे, क्योंकि सरकारी खजाना खाली पड़ा हुआ है.

 

 

 

 

 

 

 

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